एक बनो
नेक बनो
आओ सब साथ चले ब्रह्मपुत्र सेना के साथ चले।।
!!श्री खेतेश्वराय नमो!!
दाता का परिचय +"पिता का नाम: श्री शेर सिंह
जीराजपुरोहित (उदेश) माँ का नाम:
श्रीमती श्रगांरी देवी जी जन्म स्थान: गांव खेड़ातहसील:
सांचौर, जिला - जालोर (राज्य)जन्म नाम: खेतारामजी वैराग्य:
12 साल की उम्र में. गुरु का नाम: श्री श्री 1008 श्री गणेशा नन्द
जी महाराज स्थान: आसोतरा में ब्रम्हाजी मंदिर जिला बाडमेर
राजस्थान 20 मई 1961 -मुख्य (विक्रम सम्वत 2018 वैशाख
सुदी पंचम शनिवार) द्वार का भूमि पूजन नीव 28 अप्रैल, 1965 - है
ब्रम्हाजी मंदिर का भूमि पूजन नीव (विक्रम सम्वत 2020 वैशाख
सुदी पंचम) 6मई, 1984 - मंदिर (विक्रम सम्वत 2041वैशाख
सुदी पंचम रविवार) की प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव 7 मई, 1984 -
सोमवार दोपहर12:36 ब्रम्हाद्हम (विक्रम सम्वत 2041
वैशाख6सुदी) आसोतरा पर ब्रम्लीन हुए!
श्री खेतेश्वर महाराज का संक्षिप परिचय महर्षि "उलक" के गौत्र
प्रवर्तक '' उदेश'' कुल में आवरण भारतीय इतिहास में ऐसे अगिणत
जीवन भरे पडे हैं। जिनके सम्मुख आदि शक्ति ने अपनी सम्पूर्ण
शक्ति से भरपूर दिव्य तथा तेजस्वी आत्माओं का आवतर्ण
आद्यात्मिक पवित्र भूमि गौरव से अभिमण्डित रत्न गर्भा भारत
भूमि आदि अलंकारों से जडित व पवित्र भूमि पर होता रहा हैं।
परमेश्वर की चमत्कारिक दैविकशक्ति तथा पवित्र
तेजस्वी आत्माओं का आवरण होने का श्रेय भारत
भूमि को अनेको बार मिलता रहा हैं। संदर्भ में
यहा की संस्कृति आज भी पुकार रही हैं। इतना ही नही समय-समय
पर हमारे समाज को सुसंस्कृति, पवित्र और प्रेममय बनाने
की अद्भुत क्षमता तथा सामर्थ रखने वाली आदि-शक्ति के
प्रकाश-पुंज प्रतिनिधयों के रुप में आवतरित हुए हैं।
समाज में जिन्हौने निराशमय जीवन को आशामय बनाया,
नास्तिक व्यक्तियों में पवित्र आस्तिकता का ज्ञान कराया,
अन्धकारमय जीवन में ज्योति जगाकर प्रकाशित किया । पावन
धरती दिव्य आत्माओं से कभी रिक्त नही रही। इन्हीं पवित्र
आत्माओं में से एक थे युग प्रेरक श्री श्री 1008 खेतेश्वर महाराज
जिनकी अद्भभुत चमत्कारी दैविकशक्ति,सामाजिक चैतन्य
शक्ति, ब्रह्म की साकार शक्ति, ब्रह्मआनन्द का साकार दर्शन
जीवन दान की अद्भुत जीवन संजीवनी शक्ति आदि असीम
शक्तियों को संजोग स्वरुप राजपुरोहित समाज में गौतम वंशीय
महर्षि उलक की गौत्र प्रवर्तक वंशावली के 'उदेश' कुल में अवतरण
हुआ। श्री खेतेश्वर महाराज ने जाति धर्म सेउपर उठकर प्रत्येक वर्ग
में स्नेह के पुजारी रहे। संदर्भ में आज भी उनके
प्रति सभी संप्रदायो के संतो, महन्तो व जन साधारण
आदि की अटूट आस्था देखने को मिलती है। दिनों के
प्रति अति व्याकुलता एंव जन साधारण के प्रति उनके जीवन
का मुख्य गुण सामने आता हैं।
राजस्थान के बाडमेर जिले में शहर बालोतरा से लगभग दस
किलोमीटर दूर गढ सिवाडा रोड पर दिनांक 20 अप्रेल 1961
को गांव आसोतरा के पास वर्तमान ब्रह्म धाम आसोतरा के ब्रह्म
मन्दिर की नीव दिन को ठीक 12 बजे अपने कर कमलो से रखी।
जिसका शुभ मुहूत स्वंम आधारित था। ब्रह्म की प्रतिमा के स्नान
का पवित्र जल भूमि के उपर नही बिखरे जिसके संदर्भ में उन्होने
प्रतिमा से पाताल तक जल विर्सजन के लिए स्वंयं की तकनिक से
लम्बी पाईप लाईन लगावाई। 23 वर्ष तक चले निर्वहन इस मन्दिर
निमार्ण में राजस्थान की सूर्य नगरी जोधपुर के छीतर पत्थर
को तलाश कर स्वंयं के कठोर परिश्रम से
बिना किसी नक्शा तथा नक्शानवेश के 44 खम्भों पर आधारित
दो विशाल गुम्बजों में एक विशालकाय शिखर गुम्बज तथा उत्तर-
दक्षिण में पांच-पांच, कुल दस छोटी गुम्बज नुमा शिखाएं, हाथ
की सुन्दर कारीगरी की अनेक कला कृतियां जिनकी तलाश
की सफाई व अनोखे आकारो में मंडित प्रतिमायें जिसमें
महर्षि वशिष्ठ, महर्षि कश्यप, महर्षि गौतम, महर्षि पराशर
औरमहर्षि भारद्वाज सहित विभिन्न वैदिक
ऋषियों की प्रतिमाओ से जुडा पवित्र व शान्त वातावरण इस
विशाल काय ब्रह्म मन्दिर के एक दृढ संकंल्पी चिरतामृत
का समर्पण दर्शनार्थी को आकिर्षत किए बिना नही रहता।
ब्रम्हाधाम आसोतरा के ब्रह्म मन्दिरका निर्माण कार्य पूर्णकर
श्री 1008 श्री खेतेश्वर महाराज ने दिनांक 6 मई, 1984 (विक्रम
सम्वत2041 वैशाख सुदी पंचम रविवार) को सृष्टि रचता जगत
पिता भगवान ब्रम्हाजी की भव्य मूर्ती को अपने कर कमलो से
विधि वत प्रतिष्ठत किया। प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव के दिन
महाशान्ति यज्ञादि कार्यक्रम करवाये गये। इसी पुनीत अवसर
पर लगभग ढाई हजार से भी ज्यादा संत महात्माओं ने भाग लिया।
तथा लगभग 3लाख से भी ज्यादा श्रद्वालु भक्तजनों ने इस विराट
पर्व का दर्शन लाभ उठाकर भोजन प्रसाद ग्रहण किया भोजन
प्रसाद कार्यक्रम तो उस दिन से नि:शुल्क चालु हैं। तथा भविष्य में
भी देता रहेगा। ऐसे नियम(विग्न) की घोषणा का स्वरुप युग प्रेरक
श्री 1008 खेतेश्वर महाराज ने ही बनाया था। जो आज भी पूर्ण
रुप से चल रहा हैं। आम बस्ती से मीलों दुर जंग
!!श्री खेतेश्वराय नमो!!
दाता का परिचय +"पिता का नाम: श्री शेर सिंह
जीराजपुरोहित (उदेश) माँ का नाम:
श्रीमती श्रगांरी देवी जी जन्म स्थान: गांव खेड़ातहसील:
सांचौर, जिला - जालोर (राज्य)जन्म नाम: खेतारामजी वैराग्य:
12 साल की उम्र में. गुरु का नाम: श्री श्री 1008 श्री गणेशा नन्द
जी महाराज स्थान: आसोतरा में ब्रम्हाजी मंदिर जिला बाडमेर
राजस्थान 20 मई 1961 -मुख्य (विक्रम सम्वत 2018 वैशाख
सुदी पंचम शनिवार) द्वार का भूमि पूजन नीव 28 अप्रैल, 1965 - है
ब्रम्हाजी मंदिर का भूमि पूजन नीव (विक्रम सम्वत 2020 वैशाख
सुदी पंचम) 6मई, 1984 - मंदिर (विक्रम सम्वत 2041वैशाख
सुदी पंचम रविवार) की प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव 7 मई, 1984 -
सोमवार दोपहर12:36 ब्रम्हाद्हम (विक्रम सम्वत 2041
वैशाख6सुदी) आसोतरा पर ब्रम्लीन हुए!
श्री खेतेश्वर महाराज का संक्षिप परिचय महर्षि "उलक" के गौत्र
प्रवर्तक '' उदेश'' कुल में आवरण भारतीय इतिहास में ऐसे अगिणत
जीवन भरे पडे हैं। जिनके सम्मुख आदि शक्ति ने अपनी सम्पूर्ण
शक्ति से भरपूर दिव्य तथा तेजस्वी आत्माओं का आवतर्ण
आद्यात्मिक पवित्र भूमि गौरव से अभिमण्डित रत्न गर्भा भारत
भूमि आदि अलंकारों से जडित व पवित्र भूमि पर होता रहा हैं।
परमेश्वर की चमत्कारिक दैविकशक्ति तथा पवित्र
तेजस्वी आत्माओं का आवरण होने का श्रेय भारत
भूमि को अनेको बार मिलता रहा हैं। संदर्भ में
यहा की संस्कृति आज भी पुकार रही हैं। इतना ही नही समय-समय
पर हमारे समाज को सुसंस्कृति, पवित्र और प्रेममय बनाने
की अद्भुत क्षमता तथा सामर्थ रखने वाली आदि-शक्ति के
प्रकाश-पुंज प्रतिनिधयों के रुप में आवतरित हुए हैं।
समाज में जिन्हौने निराशमय जीवन को आशामय बनाया,
नास्तिक व्यक्तियों में पवित्र आस्तिकता का ज्ञान कराया,
अन्धकारमय जीवन में ज्योति जगाकर प्रकाशित किया । पावन
धरती दिव्य आत्माओं से कभी रिक्त नही रही। इन्हीं पवित्र
आत्माओं में से एक थे युग प्रेरक श्री श्री 1008 खेतेश्वर महाराज
जिनकी अद्भभुत चमत्कारी दैविकशक्ति,सामाजिक चैतन्य
शक्ति, ब्रह्म की साकार शक्ति, ब्रह्मआनन्द का साकार दर्शन
जीवन दान की अद्भुत जीवन संजीवनी शक्ति आदि असीम
शक्तियों को संजोग स्वरुप राजपुरोहित समाज में गौतम वंशीय
महर्षि उलक की गौत्र प्रवर्तक वंशावली के 'उदेश' कुल में अवतरण
हुआ। श्री खेतेश्वर महाराज ने जाति धर्म सेउपर उठकर प्रत्येक वर्ग
में स्नेह के पुजारी रहे। संदर्भ में आज भी उनके
प्रति सभी संप्रदायो के संतो, महन्तो व जन साधारण
आदि की अटूट आस्था देखने को मिलती है। दिनों के
प्रति अति व्याकुलता एंव जन साधारण के प्रति उनके जीवन
का मुख्य गुण सामने आता हैं।
राजस्थान के बाडमेर जिले में शहर बालोतरा से लगभग दस
किलोमीटर दूर गढ सिवाडा रोड पर दिनांक 20 अप्रेल 1961
को गांव आसोतरा के पास वर्तमान ब्रह्म धाम आसोतरा के ब्रह्म
मन्दिर की नीव दिन को ठीक 12 बजे अपने कर कमलो से रखी।
जिसका शुभ मुहूत स्वंम आधारित था। ब्रह्म की प्रतिमा के स्नान
का पवित्र जल भूमि के उपर नही बिखरे जिसके संदर्भ में उन्होने
प्रतिमा से पाताल तक जल विर्सजन के लिए स्वंयं की तकनिक से
लम्बी पाईप लाईन लगावाई। 23 वर्ष तक चले निर्वहन इस मन्दिर
निमार्ण में राजस्थान की सूर्य नगरी जोधपुर के छीतर पत्थर
को तलाश कर स्वंयं के कठोर परिश्रम से
बिना किसी नक्शा तथा नक्शानवेश के 44 खम्भों पर आधारित
दो विशाल गुम्बजों में एक विशालकाय शिखर गुम्बज तथा उत्तर-
दक्षिण में पांच-पांच, कुल दस छोटी गुम्बज नुमा शिखाएं, हाथ
की सुन्दर कारीगरी की अनेक कला कृतियां जिनकी तलाश
की सफाई व अनोखे आकारो में मंडित प्रतिमायें जिसमें
महर्षि वशिष्ठ, महर्षि कश्यप, महर्षि गौतम, महर्षि पराशर
औरमहर्षि भारद्वाज सहित विभिन्न वैदिक
ऋषियों की प्रतिमाओ से जुडा पवित्र व शान्त वातावरण इस
विशाल काय ब्रह्म मन्दिर के एक दृढ संकंल्पी चिरतामृत
का समर्पण दर्शनार्थी को आकिर्षत किए बिना नही रहता।
ब्रम्हाधाम आसोतरा के ब्रह्म मन्दिरका निर्माण कार्य पूर्णकर
श्री 1008 श्री खेतेश्वर महाराज ने दिनांक 6 मई, 1984 (विक्रम
सम्वत2041 वैशाख सुदी पंचम रविवार) को सृष्टि रचता जगत
पिता भगवान ब्रम्हाजी की भव्य मूर्ती को अपने कर कमलो से
विधि वत प्रतिष्ठत किया। प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव के दिन
महाशान्ति यज्ञादि कार्यक्रम करवाये गये। इसी पुनीत अवसर
पर लगभग ढाई हजार से भी ज्यादा संत महात्माओं ने भाग लिया।
तथा लगभग 3लाख से भी ज्यादा श्रद्वालु भक्तजनों ने इस विराट
पर्व का दर्शन लाभ उठाकर भोजन प्रसाद ग्रहण किया भोजन
प्रसाद कार्यक्रम तो उस दिन से नि:शुल्क चालु हैं। तथा भविष्य में
भी देता रहेगा। ऐसे नियम(विग्न) की घोषणा का स्वरुप युग प्रेरक
श्री 1008 खेतेश्वर महाराज ने ही बनाया था। जो आज भी पूर्ण
रुप से चल रहा हैं। आम बस्ती से मीलों दुर जंग