एक बनो
नेक बनो
आओ सब साथ चले ब्रह्मपुत्र सेना के साथ चले।।
"🚩ब्रह्म पुत्र सेना"
आप सबके मन में इस संगठन को लेकर काफी सारे सवाल हे की क्या हे ये, किसने इसकी नीव रखी, केसे ये कार्यरत होगा, इसके कार्य किस तरह होंगे और क्या रूपरेखा हे।।
आज में आप सबको इस संगठन के बारे में विस्तृत में जानकारी देने जा रहा हु:-
1. क्या हे "🚩ब्रह्म पुत्र सेना" ?
राजपुरोहित समाज के समस्त युवाओ के लिए एक मंच और समाज हित एवं सेवा के लिए जमीनी स्थर पर आकर कार्यरत होने के लिए युवाओ द्वारा बनाया गया एक संगठन।
2. किसने रखी ब्रह्म पुत्र सेना की नीव ?
वेसे तो काफी समय से राजपुरोहित समाज के हर युवाओ में ये सर्चा थी ही की युवाओ के लिए समाज में एक मंच हो और सब युवा मिलके समाज में एकता की अलख जगाये लेकिन इसकी शुरुआत की किशोर सिंह जी निवासी - असाडा, बाड़मेर ने।
किशोर सिंह जी ने इस कार्य के लिए समाज के कुछ युवाओ से बातचीत की और सब युवाओ की एक ही आवाज आई और एक ही राय मिली और एक संगठन को बनाने का निर्णय लिया गया।
सर्वप्रथम इस संगठन में 7 जने शामिल थे
1. किशोर सिंह जी असाडा बाड़मेर
2. मदन सिंह जी गुडानाल बाड़मेर
3. परमेश्वर सिंह जी बासडा मकराना नागौर
4. जगदीश सिंह जी जोडवाडा जालोर
5. युधिष्ठिर सिंह देवतरा पाली
6. रघुवीर सिंह जी देवड़ा जालोर
7. पीर सिंह जी रडवा बाड़मेर
सबके मन में एक ही बात थी और एक ही सोच थी निस्वार्थ भावना से समाज सेवा और युवाओ के लिए राष्ट्रिय स्थर पर एक मंच बनाया जाये।।
3. केसे और किस माध्यम से हुई इसकी तैयारी ?
इस संगठन के निर्माण के लिए और मजबूत बनाने के लिए सबने मिलकर सोशियल मीडिया ( फेसबुक और WHATSAPP) का सहयोग लिया जहा पे हाल देश के 80% युवा अपना समय देते हे।
सर्वप्रथम एक WHATSAPP ग्रुप बनाया गया जिसमे 5 युवाओ को जोड़ा गया और इस संगठन को क्या नाम दिया जाये उस पे विचार विमर्श हुआ।।
सबकी एक ही सोच थी और समाज के प्रति अपार प्रेम की भावना थी।
अतः सबने मिलकर इसका नाम "ब्रह्म पुत्र सेना"
रखा क्यूंकि श्री श्री 1008 श्री गुरुवर खेतेश्वर महाराज स्वयं ब्रह्म अवतारी थे जिन्होंने राजपुरोहित समाज में जन्म लिया था अतः ये "ब्रह्म पुत्र सेना" नाम को फाइनल कर दिया गया।
फिर हुआ कार्य शुरू और फेसबुक पे भी "ब्रह्म पुत्र सेना" नाम से एक पेज बना दिया गया।।
4. क्या उदेश्य के साथ इसके गठन का विचार बनाया गया?
उदेश्य एक मात्र था सबका जमीनी स्थर पर आकर समाज सेवा और राजपुरोहित समाज की युवापीढ़ी के लिए एक खुला मंच हो जिस से सबको अपनी बात रखने का पूरा अधिकार हो और समाज में चल रहे सभी मुद्दों पर गहन विचार।।
5. क्या रूपरेखा बनाई गयी इस संगठन को लेकर ?
इस संगठन को मजबूत बनाने के लिए पहले सबने राजस्थान राज्य के हर जिले जहा पर राजपुरोहित निवास करते हे वहा से सभी युवाओ को ग्रुप में जोड़ने का कार्य शुरू किया धीरे धीरे ग्रुप में संख्या बड़ने लगी और राजस्थान प्रान्त के 12 जिलो से जहा अधिकतर संख्या में राजपुरोहित समाज के लोग निवास करते हे वहा से युवा जुड़े।।
फिर हर जीले में आने वाली सभी तहसील से 1 2 सक्रीय युवाओ को जोड़ा गया जिस से उस तहसील के हर गाँव तक इस संगठन की आवाज पंहुचा दी जाये।।
युवाओ ने जेसे ही इस संगठन के बारे में जिस से भी सुना बढ़ चढ़ के इस नेक कार्य में भाग लेने लगे और देखते ही देखते whatsapp पे तक़रीबन 40 से ज्यादा ग्रुप बन गये इर हर जिले से ग्रुप बना दिए गये।।
ब्रह्म पुत्र सेना नाम में ही इतनी शक्ति और आकर्षक नजर आया की मात्र 24 घंटे में फेसबुक पे बनाये गये पेज को तक़रीबन 500 लोगो ने पसंद किया।।
अब होना क्या था सोशल मीडिया और राजपुरोहित समाज के युवा एक मुंह पे एक ही नाम नजर आने लगा ब्रह्म पुत्र सेना।। पुरे भारत देश में निवास करने वाले सभी राजपुरोहित युवाओ के फ़ोन और मेसेज आने लगे हमें भी जोड़ो हम भी जुड़ना।।
एकता की और समाज सेवा को लेकर राजपुरोहित युवाओ में अलग ही उत्साह नजर आया और देखते ही देखते चारो तरफ सोशल मीडिया पे जोर छोर से इस संगठन का प्रचार शुरू हो गया।।
6. क्या रिजल्ट रहा?
सभी युवाओ की मेहनत ने आखिर रंग लाया और 9 तारीख को रखे गये इसके प्रथम सम्मलेन में ही तारीख 9/11/2014 को ब्रह्म धाम पे सिर्फ एक महीने की मेहनत और एक मेसेज के द्वारा ही राजस्थान प्रान्त के तक़रीबन 200 युवाओ ने उपस्थित दे दी।।
ये सब देख के एक अलग ही ख़ुशी महसूस हुई की आखिर राजपुरोहित युवाओ में एकता को लेकर कितनी चाहत हे और इस सम्मलेन में एक बात और नजर आई की सबकी सोच एक ही हे समाज सेवा और सिर्फ समाज सेवा।।
यह ही बहुत बडी उपलब्धि रही की सिर्फ whatsapp और facebook के माध्यम से शुरू हुए कार्य में युवाओ ने जमकर हिस्सा लिया।।
"एक बनो नेक बनो"
जय श्री गुरुवर।।। जय श्री खेतेश्वर।।
"🚩ब्रह्म पुत्र सेना" सदस्यफेसबुक से जुड़ने click करे
"🚩ब्रह्म पुत्र सेना"
आप सबके मन में इस संगठन को लेकर काफी सारे सवाल हे की क्या हे ये, किसने इसकी नीव रखी, केसे ये कार्यरत होगा, इसके कार्य किस तरह होंगे और क्या रूपरेखा हे।।
आज में आप सबको इस संगठन के बारे में विस्तृत में जानकारी देने जा रहा हु:-
1. क्या हे "🚩ब्रह्म पुत्र सेना" ?
राजपुरोहित समाज के समस्त युवाओ के लिए एक मंच और समाज हित एवं सेवा के लिए जमीनी स्थर पर आकर कार्यरत होने के लिए युवाओ द्वारा बनाया गया एक संगठन।
2. किसने रखी ब्रह्म पुत्र सेना की नीव ?
वेसे तो काफी समय से राजपुरोहित समाज के हर युवाओ में ये सर्चा थी ही की युवाओ के लिए समाज में एक मंच हो और सब युवा मिलके समाज में एकता की अलख जगाये लेकिन इसकी शुरुआत की किशोर सिंह जी निवासी - असाडा, बाड़मेर ने।
किशोर सिंह जी ने इस कार्य के लिए समाज के कुछ युवाओ से बातचीत की और सब युवाओ की एक ही आवाज आई और एक ही राय मिली और एक संगठन को बनाने का निर्णय लिया गया।
सर्वप्रथम इस संगठन में 7 जने शामिल थे
1. किशोर सिंह जी असाडा बाड़मेर
2. मदन सिंह जी गुडानाल बाड़मेर
3. परमेश्वर सिंह जी बासडा मकराना नागौर
4. जगदीश सिंह जी जोडवाडा जालोर
5. युधिष्ठिर सिंह देवतरा पाली
6. रघुवीर सिंह जी देवड़ा जालोर
7. पीर सिंह जी रडवा बाड़मेर
सबके मन में एक ही बात थी और एक ही सोच थी निस्वार्थ भावना से समाज सेवा और युवाओ के लिए राष्ट्रिय स्थर पर एक मंच बनाया जाये।।
3. केसे और किस माध्यम से हुई इसकी तैयारी ?
इस संगठन के निर्माण के लिए और मजबूत बनाने के लिए सबने मिलकर सोशियल मीडिया ( फेसबुक और WHATSAPP) का सहयोग लिया जहा पे हाल देश के 80% युवा अपना समय देते हे।
सर्वप्रथम एक WHATSAPP ग्रुप बनाया गया जिसमे 5 युवाओ को जोड़ा गया और इस संगठन को क्या नाम दिया जाये उस पे विचार विमर्श हुआ।।
सबकी एक ही सोच थी और समाज के प्रति अपार प्रेम की भावना थी।
अतः सबने मिलकर इसका नाम "ब्रह्म पुत्र सेना"
रखा क्यूंकि श्री श्री 1008 श्री गुरुवर खेतेश्वर महाराज स्वयं ब्रह्म अवतारी थे जिन्होंने राजपुरोहित समाज में जन्म लिया था अतः ये "ब्रह्म पुत्र सेना" नाम को फाइनल कर दिया गया।
फिर हुआ कार्य शुरू और फेसबुक पे भी "ब्रह्म पुत्र सेना" नाम से एक पेज बना दिया गया।।
4. क्या उदेश्य के साथ इसके गठन का विचार बनाया गया?
उदेश्य एक मात्र था सबका जमीनी स्थर पर आकर समाज सेवा और राजपुरोहित समाज की युवापीढ़ी के लिए एक खुला मंच हो जिस से सबको अपनी बात रखने का पूरा अधिकार हो और समाज में चल रहे सभी मुद्दों पर गहन विचार।।
5. क्या रूपरेखा बनाई गयी इस संगठन को लेकर ?
इस संगठन को मजबूत बनाने के लिए पहले सबने राजस्थान राज्य के हर जिले जहा पर राजपुरोहित निवास करते हे वहा से सभी युवाओ को ग्रुप में जोड़ने का कार्य शुरू किया धीरे धीरे ग्रुप में संख्या बड़ने लगी और राजस्थान प्रान्त के 12 जिलो से जहा अधिकतर संख्या में राजपुरोहित समाज के लोग निवास करते हे वहा से युवा जुड़े।।
फिर हर जीले में आने वाली सभी तहसील से 1 2 सक्रीय युवाओ को जोड़ा गया जिस से उस तहसील के हर गाँव तक इस संगठन की आवाज पंहुचा दी जाये।।
युवाओ ने जेसे ही इस संगठन के बारे में जिस से भी सुना बढ़ चढ़ के इस नेक कार्य में भाग लेने लगे और देखते ही देखते whatsapp पे तक़रीबन 40 से ज्यादा ग्रुप बन गये इर हर जिले से ग्रुप बना दिए गये।।
ब्रह्म पुत्र सेना नाम में ही इतनी शक्ति और आकर्षक नजर आया की मात्र 24 घंटे में फेसबुक पे बनाये गये पेज को तक़रीबन 500 लोगो ने पसंद किया।।
अब होना क्या था सोशल मीडिया और राजपुरोहित समाज के युवा एक मुंह पे एक ही नाम नजर आने लगा ब्रह्म पुत्र सेना।। पुरे भारत देश में निवास करने वाले सभी राजपुरोहित युवाओ के फ़ोन और मेसेज आने लगे हमें भी जोड़ो हम भी जुड़ना।।
एकता की और समाज सेवा को लेकर राजपुरोहित युवाओ में अलग ही उत्साह नजर आया और देखते ही देखते चारो तरफ सोशल मीडिया पे जोर छोर से इस संगठन का प्रचार शुरू हो गया।।
6. क्या रिजल्ट रहा?
सभी युवाओ की मेहनत ने आखिर रंग लाया और 9 तारीख को रखे गये इसके प्रथम सम्मलेन में ही तारीख 9/11/2014 को ब्रह्म धाम पे सिर्फ एक महीने की मेहनत और एक मेसेज के द्वारा ही राजस्थान प्रान्त के तक़रीबन 200 युवाओ ने उपस्थित दे दी।।
ये सब देख के एक अलग ही ख़ुशी महसूस हुई की आखिर राजपुरोहित युवाओ में एकता को लेकर कितनी चाहत हे और इस सम्मलेन में एक बात और नजर आई की सबकी सोच एक ही हे समाज सेवा और सिर्फ समाज सेवा।।
यह ही बहुत बडी उपलब्धि रही की सिर्फ whatsapp और facebook के माध्यम से शुरू हुए कार्य में युवाओ ने जमकर हिस्सा लिया।।
"एक बनो नेक बनो"
जय श्री गुरुवर।।। जय श्री खेतेश्वर।।
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