शुक्रवार, 8 मई 2015

   श्री।          श्री जगत पिता  सृष्टि रासियता भगवान ब्रह्माजी  विश्व का दूसरा तीर्थ ब्रह्मधाम आसोतरा में श्री श्री 1008 ब्रह्मलीन ब्रह्मावतर खेतारामजी महाराज के चरणों में वंदनम श्री श्री 1008 सावित्री सिद्ध पीठाधीश्वर तुलसारामजी महाराज के आशीर्वाद से श भारतीय साधू समाज के प्रदेशाध्यक्ष महामंडलेश्वर निर्मलदास जी महाराज के  संरक्षक  में  ब्रह्मधाम गादीपति के परम शिष्य चार वेदों के ज्ञता वेदांताचार्य  के मार्ग दर्शक में  महा सम्मेलन सम्पन हुआ   22/23_4 _ 2015 को  हुआ ब्रह्मपुत्र सेना का  महा सेवा सम्मेलन    ब्रह्मधाम आसोतरा की वर्ष गाँठ पर दो दिनसेवाएं दी        मुख्य जल सेवा और पार्किग व्यवस्था की इस अवसर भारत के कोने कोने से ब्रह्म पुत्र सेनिक पधारे सब ने तन और मन से दो दिन सेवा दी  इस  सम्मेलन में   सगठन को मजबूत बनाने पर चर्चा की जय  ब्रह्माजी री जय खेतेश्वर दातारी सा ब्रह्मपुत्र सेना राजस्थान
👉सभी समाज साथियो ने विनम्र अपील है की आप ब्रह्मपुत्र सेना को जमीनी स्तर पर कार्य करने हेतु जिमेदारी निभाये ,समय का योगदान दे कर ,सेना की मजबूती के सहभागी बने ,सामाजिक माध्यम पर सिर्फ बातो से ,कुछ नही होगा ,हमे ग्रामीण इकाई मजबूत बनानी पड़ेगी इसलिए ग्रामीण स्तर पर हमारी समाज के स्थाई सक्रिय साथियो से संपर्क करे और सेना में जोड़े ,समूह में विराजमान प्रत्येक सेनिक को अपने गाव से 5 सदस्य ऐसे जोड़ने है जो स्थाई गाव में रहते हो ,ये ही सेना की प्रबल मजबूती होगी ,,ये कार्य कल से चुरू करना है ,और सदस्यों की लिस्ट बनाकर सेना के पदाधिकारी को भेजे ,जुड़ने वाले व्यक्ति सामाजिक माध्यम पर सक्रिय न हो तो भी चलेगा ,उनके संपर्क नम्बर लेके रखे ,इस सन्देश जो नजर अंदाज न कर के ,एक बनो नेक बनो
समाज के जन जन जो जोड़ो की निति से कार्य चुरू कर
जय ब्रह्माजी
जय खेतेश्वर






   एक बनो नेक बनो आओ सब साथ चले ब्रह्मपुत्र सेना के साथ चले।।

शनिवार, 25 अप्रैल 2015

ब्रह्मपुत्र सेना ने की आगाज सिवाना में श्री श्री 1008 खेतेश्वर भगवान की जयंती पर रैली

ब्रह्मपुत्र सेना ने की आगाज सिवाना में श्री श्री 1008 खेतेश्वर भगवान की जयंती पर रैली 


सिवाना में मनाई गाजे बजे के साथ मनाई गई 103 वी श्री श्री 1008 खेतेश्वर भगवान की जयन्ती  इस अवसर पर तरह की झांकिया निकाली गई


और संत महात्माओं का सानिघ्य भी मिला   
श्री महामंडलेश्वर भारतीय साधू समाज के प्रदेशाधयक्ष  महंत श्री निर्मल दास जी महाराज ,ब्रह्मधाम गादिपति श्री श्री 1008  सावित्रि सिद्ध पीठाधीश्वर तुलसारामजी महाराज के परम शिष्य वेदांताचार्य धनारामजी महाराज और गौ भक्त गोपालराम जी महाराज के सानिध्य में रैली रखी गई राजपुरोहितो का निवास सिवाना से गांधी चौक होते हुए श्री खेतेश्वर छात्रावास सिवाना में श्री खेतेश्वर  भगवान की आरती करने के बाद में रैली  संपन हुई 
आयोजक समस्त राजपुरोहित समाज सिवाना

बुधवार, 11 फ़रवरी 2015

एक बनो नेक बनो आओ सब साथ चले ब्रह्मपुत्र सेना के साथ चले।।

!!श्री खेतेश्वराय नमो!!
दाता का परिचय +"पिता का नाम: श्री शेर सिंह
जीराजपुरोहित (उदेश) माँ का नाम:
श्रीमती श्रगांरी देवी जी जन्म स्थान: गांव खेड़ातहसील:
सांचौर, जिला - जालोर (राज्य)जन्म नाम: खेतारामजी वैराग्य:
12 साल की उम्र में. गुरु का नाम: श्री श्री 1008 श्री गणेशा नन्द
जी महाराज स्थान: आसोतरा में ब्रम्हाजी मंदिर जिला बाडमेर
राजस्थान 20 मई 1961 -मुख्य (विक्रम सम्वत 2018 वैशाख
सुदी पंचम शनिवार) द्वार का भूमि पूजन नीव 28 अप्रैल, 1965 - है
ब्रम्हाजी मंदिर का भूमि पूजन नीव (विक्रम सम्वत 2020 वैशाख
सुदी पंचम) 6मई, 1984 - मंदिर (विक्रम सम्वत 2041वैशाख
सुदी पंचम रविवार) की प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव 7 मई, 1984 -
सोमवार दोपहर12:36 ब्रम्हाद्हम (विक्रम सम्वत 2041
वैशाख6सुदी) आसोतरा पर ब्रम्लीन हुए!
श्री खेतेश्वर महाराज का संक्षिप परिचय महर्षि "उलक" के गौत्र
प्रवर्तक '' उदेश'' कुल में आवरण भारतीय इतिहास में ऐसे अगिणत
जीवन भरे पडे हैं। जिनके सम्मुख आदि शक्ति ने अपनी सम्पूर्ण
शक्ति से भरपूर दिव्य तथा तेजस्वी आत्माओं का आवतर्ण
आद्यात्मिक पवित्र भूमि गौरव से अभिमण्डित रत्न गर्भा भारत
भूमि आदि अलंकारों से जडित व पवित्र भूमि पर होता रहा हैं।
परमेश्वर की चमत्कारिक दैविकशक्ति तथा पवित्र
तेजस्वी आत्माओं का आवरण होने का श्रेय भारत
भूमि को अनेको बार मिलता रहा हैं। संदर्भ में
यहा की संस्कृति आज भी पुकार रही हैं। इतना ही नही समय-समय
पर हमारे समाज को सुसंस्कृति, पवित्र और प्रेममय बनाने
की अद्भुत क्षमता तथा सामर्थ रखने वाली आदि-शक्ति के
प्रकाश-पुंज प्रतिनिधयों के रुप में आवतरित हुए हैं।
समाज में जिन्हौने निराशमय जीवन को आशामय बनाया,
नास्तिक व्यक्तियों में पवित्र आस्तिकता का ज्ञान कराया,
अन्धकारमय जीवन में ज्योति जगाकर प्रकाशित किया । पावन
धरती दिव्य आत्माओं से कभी रिक्त नही रही। इन्हीं पवित्र
आत्माओं में से एक थे युग प्रेरक श्री श्री 1008 खेतेश्वर महाराज
जिनकी अद्भभुत चमत्कारी दैविकशक्ति,सामाजिक चैतन्य
शक्ति, ब्रह्म की साकार शक्ति, ब्रह्मआनन्द का साकार दर्शन
जीवन दान की अद्भुत जीवन संजीवनी शक्ति आदि असीम
शक्तियों को संजोग स्वरुप राजपुरोहित समाज में गौतम वंशीय
महर्षि उलक की गौत्र प्रवर्तक वंशावली के 'उदेश' कुल में अवतरण
हुआ। श्री खेतेश्वर महाराज ने जाति धर्म सेउपर उठकर प्रत्येक वर्ग
में स्नेह के पुजारी रहे। संदर्भ में आज भी उनके
प्रति सभी संप्रदायो के संतो, महन्तो व जन साधारण
आदि की अटूट आस्था देखने को मिलती है। दिनों के
प्रति अति व्याकुलता एंव जन साधारण के प्रति उनके जीवन
का मुख्य गुण सामने आता हैं।
राजस्थान के बाडमेर जिले में शहर बालोतरा से लगभग दस
किलोमीटर दूर गढ सिवाडा रोड पर दिनांक 20 अप्रेल 1961
को गांव आसोतरा के पास वर्तमान ब्रह्म धाम आसोतरा के ब्रह्म
मन्दिर की नीव दिन को ठीक 12 बजे अपने कर कमलो से रखी।
जिसका शुभ मुहूत स्वंम आधारित था। ब्रह्म की प्रतिमा के स्नान
का पवित्र जल भूमि के उपर नही बिखरे जिसके संदर्भ में उन्होने
प्रतिमा से पाताल तक जल विर्सजन के लिए स्वंयं की तकनिक से
लम्बी पाईप लाईन लगावाई। 23 वर्ष तक चले निर्वहन इस मन्दिर
निमार्ण में राजस्थान की सूर्य नगरी जोधपुर के छीतर पत्थर
को तलाश कर स्वंयं के कठोर परिश्रम से
बिना किसी नक्शा तथा नक्शानवेश के 44 खम्भों पर आधारित
दो विशाल गुम्बजों में एक विशालकाय शिखर गुम्बज तथा उत्तर-
दक्षिण में पांच-पांच, कुल दस छोटी गुम्बज नुमा शिखाएं, हाथ
की सुन्दर कारीगरी की अनेक कला कृतियां जिनकी तलाश
की सफाई व अनोखे आकारो में मंडित प्रतिमायें जिसमें
महर्षि वशिष्ठ, महर्षि कश्यप, महर्षि गौतम, महर्षि पराशर
औरमहर्षि भारद्वाज सहित विभिन्न वैदिक
ऋषियों की प्रतिमाओ से जुडा पवित्र व शान्त वातावरण इस
विशाल काय ब्रह्म मन्दिर के एक दृढ संकंल्पी चिरतामृत
का समर्पण दर्शनार्थी को आकिर्षत किए बिना नही रहता।
ब्रम्हाधाम आसोतरा के ब्रह्म मन्दिरका निर्माण कार्य पूर्णकर
श्री 1008 श्री खेतेश्वर महाराज ने दिनांक 6 मई, 1984 (विक्रम
सम्वत2041 वैशाख सुदी पंचम रविवार) को सृष्टि रचता जगत
पिता भगवान ब्रम्हाजी की भव्य मूर्ती को अपने कर कमलो से
विधि वत प्रतिष्ठत किया। प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव के दिन
महाशान्ति यज्ञादि कार्यक्रम करवाये गये। इसी पुनीत अवसर
पर लगभग ढाई हजार से भी ज्यादा संत महात्माओं ने भाग लिया।
तथा लगभग 3लाख से भी ज्यादा श्रद्वालु भक्तजनों ने इस विराट
पर्व का दर्शन लाभ उठाकर भोजन प्रसाद ग्रहण किया भोजन
प्रसाद कार्यक्रम तो उस दिन से नि:शुल्क चालु हैं। तथा भविष्य में
भी देता रहेगा। ऐसे नियम(विग्न) की घोषणा का स्वरुप युग प्रेरक
श्री 1008 खेतेश्वर महाराज ने ही बनाया था। जो आज भी पूर्ण
रुप से चल रहा हैं। आम बस्ती से मीलों दुर जंग

कैसे बनी ब्रह्मपुत्र सेना किसने की आगाज कहा से बनीब्रह्मपुत्र सेना

एक बनो नेक बनो आओ सब साथ चले ब्रह्मपुत्र सेना के साथ चले।।



"🚩ब्रह्म पुत्र सेना"
आप सबके मन में इस संगठन को लेकर काफी सारे सवाल हे की क्या हे ये, किसने इसकी नीव रखी, केसे ये कार्यरत होगा, इसके कार्य किस तरह होंगे और क्या रूपरेखा हे।।
आज में आप सबको इस संगठन के बारे में विस्तृत में जानकारी देने जा रहा हु:-
1. क्या हे "🚩ब्रह्म पुत्र सेना" ?
राजपुरोहित समाज के समस्त युवाओ के लिए एक मंच और समाज हित एवं सेवा के लिए जमीनी स्थर पर आकर कार्यरत होने के लिए युवाओ द्वारा बनाया गया एक संगठन।
2. किसने रखी ब्रह्म पुत्र सेना की नीव ?
वेसे तो काफी समय से राजपुरोहित समाज के हर युवाओ में ये सर्चा थी ही की युवाओ के लिए समाज में एक मंच हो और सब युवा मिलके समाज में एकता की अलख जगाये लेकिन इसकी शुरुआत की किशोर सिंह जी निवासी - असाडा, बाड़मेर ने।
किशोर सिंह जी ने इस कार्य के लिए समाज के कुछ युवाओ से बातचीत की और सब युवाओ की एक ही आवाज आई और एक ही राय मिली और एक संगठन को बनाने का निर्णय लिया गया।
सर्वप्रथम इस संगठन में 7 जने शामिल थे
1. किशोर सिंह जी असाडा बाड़मेर
2. मदन सिंह जी गुडानाल बाड़मेर
3. परमेश्वर सिंह जी बासडा मकराना नागौर
4. जगदीश सिंह जी जोडवाडा जालोर
5. युधिष्ठिर सिंह देवतरा पाली
6. रघुवीर सिंह जी देवड़ा जालोर
7. पीर सिंह जी रडवा बाड़मेर
सबके मन में एक ही बात थी और एक ही सोच थी निस्वार्थ भावना से समाज सेवा और युवाओ के लिए राष्ट्रिय स्थर पर एक मंच बनाया जाये।।
3. केसे और किस माध्यम से हुई इसकी तैयारी ?
इस संगठन के निर्माण के लिए और मजबूत बनाने के लिए सबने मिलकर सोशियल मीडिया ( फेसबुक और WHATSAPP) का सहयोग लिया जहा पे हाल देश के 80% युवा अपना समय देते हे।
सर्वप्रथम एक WHATSAPP ग्रुप बनाया गया जिसमे 5 युवाओ को जोड़ा गया और इस संगठन को क्या नाम दिया जाये उस पे विचार विमर्श हुआ।।
सबकी एक ही सोच थी और समाज के प्रति अपार प्रेम की भावना थी।
अतः सबने मिलकर इसका नाम "ब्रह्म पुत्र सेना"
रखा क्यूंकि श्री श्री 1008 श्री गुरुवर खेतेश्वर महाराज स्वयं ब्रह्म अवतारी थे जिन्होंने राजपुरोहित समाज में जन्म लिया था अतः ये "ब्रह्म पुत्र सेना" नाम को फाइनल कर दिया गया।
फिर हुआ कार्य शुरू और फेसबुक पे भी "ब्रह्म पुत्र सेना" नाम से एक पेज बना दिया गया।।
4. क्या उदेश्य के साथ इसके गठन का विचार बनाया गया?
उदेश्य एक मात्र था सबका जमीनी स्थर पर आकर समाज सेवा और राजपुरोहित समाज की युवापीढ़ी के लिए एक खुला मंच हो जिस से सबको अपनी बात रखने का पूरा अधिकार हो और समाज में चल रहे सभी मुद्दों पर गहन विचार।।
5. क्या रूपरेखा बनाई गयी इस संगठन को लेकर ?
इस संगठन को मजबूत बनाने के लिए पहले सबने राजस्थान राज्य के हर जिले जहा पर राजपुरोहित निवास करते हे वहा से सभी युवाओ को ग्रुप में जोड़ने का कार्य शुरू किया धीरे धीरे ग्रुप में संख्या बड़ने लगी और राजस्थान प्रान्त के 12 जिलो से जहा अधिकतर संख्या में राजपुरोहित समाज के लोग निवास करते हे वहा से युवा जुड़े।।
फिर हर जीले में आने वाली सभी तहसील से 1 2 सक्रीय युवाओ को जोड़ा गया जिस से उस तहसील के हर गाँव तक इस संगठन की आवाज पंहुचा दी जाये।।
युवाओ ने जेसे ही इस संगठन के बारे में जिस से भी सुना बढ़ चढ़ के इस नेक कार्य में भाग लेने लगे और देखते ही देखते whatsapp पे तक़रीबन 40 से ज्यादा ग्रुप बन गये इर हर जिले से ग्रुप बना दिए गये।।
ब्रह्म पुत्र सेना नाम में ही इतनी शक्ति और आकर्षक नजर आया की मात्र 24 घंटे में फेसबुक पे बनाये गये पेज को तक़रीबन 500 लोगो ने पसंद किया।।
अब होना क्या था सोशल मीडिया और राजपुरोहित समाज के युवा एक मुंह पे एक ही नाम नजर आने लगा ब्रह्म पुत्र सेना।। पुरे भारत देश में निवास करने वाले सभी राजपुरोहित युवाओ के फ़ोन और मेसेज आने लगे हमें भी जोड़ो हम भी जुड़ना।।
एकता की और समाज सेवा को लेकर राजपुरोहित युवाओ में अलग ही उत्साह नजर आया और देखते ही देखते चारो तरफ सोशल मीडिया पे जोर छोर से इस संगठन का प्रचार शुरू हो गया।।
6. क्या रिजल्ट रहा?
सभी युवाओ की मेहनत ने आखिर रंग लाया और 9 तारीख को रखे गये इसके प्रथम सम्मलेन में ही तारीख 9/11/2014 को ब्रह्म धाम पे सिर्फ एक महीने की मेहनत और एक मेसेज के द्वारा ही राजस्थान प्रान्त के तक़रीबन 200 युवाओ ने उपस्थित दे दी।।
ये सब देख के एक अलग ही ख़ुशी महसूस हुई की आखिर राजपुरोहित युवाओ में एकता को लेकर कितनी चाहत हे और इस सम्मलेन में एक बात और नजर आई की सबकी सोच एक ही हे समाज सेवा और सिर्फ समाज सेवा।।
यह ही बहुत बडी उपलब्धि रही की सिर्फ whatsapp और facebook के माध्यम से शुरू हुए कार्य में युवाओ ने जमकर हिस्सा लिया।।
"एक बनो नेक बनो"
जय श्री गुरुवर।।। जय श्री खेतेश्वर।।
"🚩ब्रह्म पुत्र सेना" सदस्यफेसबुक से जुड़ने click करे

शनिवार, 7 फ़रवरी 2015

ॐ भगवते वासुदेवाय नमः

ब्रह्मपुत्र सेना परिवार -एक बनो नेक बनो

!!ब्रह्मपुत्र सेना के उदेश्य!!
ब्रह्मपुत्र सेना से राजपुरोहित समाज के जन जन को जोड़ना है
ब्रह्मपुत्र सेना सर्व हित की निति से समाज हित में कार्य करेगी
ब्रह्मपुत्र सेना समाज हित की एक व्यवस्था है ,इस व्यवस्था के जरिये हम सब मिलकर समाज सेवा करेंगे
ब्रह्मपुत्र सेना के जरिये समाज हित में ,शिक्षा को बढ़ावा,नशा मुक्ति ,आर्थिक कमजोर परिवारो की सहायता,आदि
ब्रह्मपुत्र सेना के जरिये हम ,समाज में जागृति अभियान चलाएंगे ,क्रमबद्ध तरीके से जिसमे ,रीती रिवाज परम्परा रिश्ते नाते कुप्रथा के प्रति समाज में जन जन को दिशा निर्देश दिए जायेंगे
ब्रह्मपुत्र सेना के जरिये समाज के प्रत्येक परिवार की मुलभुत आवश्यकता के प्रति जोर दिया जायेगा ,ताकि हमारी समाज का प्रत्येक परिवार मुलभुत सुविधाओ से वंचित न रहे
ब्रह्मपुत्र सेना के जरिये समाज के उन नो जवान जागरूक युवाओ को प्रोत्शान दिया जायेगा ,ताकि समाज का पढ़ा लिखा नो जवान बेरोजगार न रहे
ब्रह्मपुत्र सेना के जरिये पुरे भारत में समाज जन जाग्रति समेलन किये जायेंगे ,कर्म भूमि से जुड़े सभी समाज के साथी सेना से जुड़ सके
ब्रह्मपुत्र सेना के जरिये गरीब परिवारो की सूचि तयार की जायेगी जो गरीबी रेखा से निचे जीवन यापन कर रहे है ,आर्थिक बहुत कमजोर है सेना के द्वारा ऐसे परिवारो को सरकारी योजनाओ से जोड़ा जायेगा और आर्थिक मदद की जायेगी
ब्रह्मपुत्र सेना के जरिये हमारे आस्था के केन्द्रो पर समय समय समेलन किये जायेंगे ,बिजरोल खेड़ा,आशोत्रा ,ब्रह्माजी मन्दिर कालन्द्री ,सेना के द्वारा सेवा प्रदान की जायेगी
ब्रह्मपुत्र सेना के उदेश्य निर्मल ,और साफ़ है ,समाज हित ,समाज सेवा ,
एक बनो नेक बनो की निति और सकारात्मक विचारो के साथ ब्रह्मपुत्र सेना में जुड़े और जोड़े ,
🚩जय ब्रह्माजी
🚩जय खतेश्वर
ब्रह्मपुत्र सेना परिवार




ब्रह्मपुत्र सेना राजस्थान - बीपीएस में शामिल होंगे 11 जिलों के कार्यकर्ता
बाङमेर ब्रह्मधाम आसोतरा । राजपुरोहित समाज के अग्रिम संगठन ब्रह्मपुत्र सेना में प्रदेश के 11 जिलों के कार्यकर्ता शामिल होंगे। संगठन के कार्यों में प्रमुख रूप से समाज के युवाओं में एकजुटता, सामाजिक रीति रिवाजों और परम्पराओं को अक्षुण्ण रखना एवं समाज उत्थान की दिशा में हर संभव प्रयास करना है।
गाँव जोड़वाड़ा जिला जालोर निवासी जगदीश राजपुरोहित के अनुसार ब्रह्मपुत्र सेना में अब तक सैकड़ों युवा जुड़ चुके है और फिलवक्त प्रदेश के 11 जिलों से संगठन में युवाओं का आवा गमन जारी है। इस संबंध में होने वाली बैठक में निश्चित कार्य योजना के संदर्भ में भी विचार विमर्श किया जाएगा। उन्होंने बताया कि ब्रह्मपुत्र सेना समाज में ना सिर्फ शिक्षा का प्रसार करेगी बल्कि युवाओं एवं बालकों को समाज की परंपराओं, संस्कृति एवं रीति रिवाजों से भी ओतप्रोत करेगी। सेना का सदस्यता अभियान जारी है और प्रदेशस्तरीय कार्यकारिणी बन चुकी है। पहली बैठक के लिए लगभग सभी तैयारियाँ पूर्ण कर ली गई है। ब्रह्मपुत्र सेना का सपना परमेश्वरसिंह गाँव मकराणा, नागौर  किशोरसिंह, गाँव असाडा बाङमेर युधिष्ठिरसिंह, गाँव देवतरा पाली मदनसिंह, गांव सिवाना बाङमेर रामसिंह, गाँव धिरा सिवाना बाङमेर मोहनसिंह गाँव डूंगरी जालोर रघुवीरसिंह गाँव देवड़ा सांचौर लक्ष्मणसिंह गाँव पादरू सिवाना बाङमेर कल्याणसिंह गाँव बावतरा जालोर ने राजपुरोहित समाज संगठित करने का दरढ सकलप लिया था। और और आखिर उसे क्रियान्वयन करके दिखाया। इस संबंध में एप्स एवं सोशल वाटसअप नेटवर्क पर भी फेसबुक पेज जारी किया गया है। जगदीश आर राजपुरोहित ने समाज बंधुओ से अपील की है। कि वे युवा वर्ग को इस संगठन में जोड़ें। और समाज हित में कार्यों को गति दें। ओर सिर्फ सभी राजपुरोहित समाज के आॅल भारत के राजपुरोहित समाज के लोगों को संगठित करने का जोर सौर से अती प्रयास जारी है। जो राजपुरोहित समाज के लगभग पुरा भारत से 3 महिनो मे 150000 ब्रह्मपुत्र सेना कार्य करता जुङ सुके। ओर आगे काम तेज प्रगति पर है सिर्फ युवाओं का दरढ सक्लप से यह संभव हो पाया। क्योंकि यह समाज सुधार केवल समाज के युवा ही बदल सकते है। जो बिन मोतिया के माला अधुरी है वेसे ही समाज के बिना संगठन के राजपुरोहित समाज अधुरा है नहीं हमे पदों का लालच नही हमे गौत्र का नहीं हमे धन का सिर्फ हमे लालच है समाज हित का। आओ हम सब राजपुरोहित समाज साथ चले हम। बढ चढे कदमो से कदम। आओ हम साथ चले हम। आओ हम साथ चले हम।


एक बनो नेक बनो आओ सब साथ चले ब्रह्मपुत्र सेना के साथ चले।।

रविवार, 4 जनवरी 2015

आओ आगे बढे सबको साथ ले चले ब्रह्मपुत्र सेना का क्या है उद्देश्य क्या कार्य कर रही है समाज में ब्रह्मपुत्र सेना

मेरे प्रिय राजपुरोहित बधुओ को सुशित किया जाता है राजपुरोहित ब्रह्मपुत्र सेना संगठन कि अधिक जानकारी शोसल न्यूज के माध्यम से घर बैठे जान सकते (LSP)  हमारा उद्देश्य समाज संगठित करना राजपुरोहित समाज के जन जन  युवाओं सेना जोङना ताकि सग परसितियो या कोई राजपुरोहित समाज के कमजोर लोगों को शोषण मुक्त करने ताकि हर राजपुरोहित समाज के युवा आगे आए मे हर राजपुरोहित बन्धु तक मेसेज के जरिए एक स्थान पर एकत्रित हो सके एक ओर सगठित हो सके राजपुरोहित समाज एक होकर किसी राजपुरोहित परिवार कि आर्थिक मदद कर सके हर राजपुरोहित बन्धु तो अमीर नही है ऐसे कई परिवार मे महिला विधवा है किसी परिवार मे वारिश नही ऐसे मे बङे बुजुर्गों का परिवार का पालन पोषण कैसे होगा किसी के पास निसन्तान है ओर कोई जमीन जायदाद नही है ऐसे परिवार राजपुरोहित समाज मे घुट घुट जी रहे है ऐसे मे हम एक होकर किसी परिवार की सहायता कर सकते ऐसे उदाहरण मे देखने को मिला सायला कि निकट गाँव सराणा मे एक राजपुरोहित समाज मे एक आदमी गुजरात मजदूरी के लिए गया था ओर घर नही लोटा ओर महिला ने सायला पुलिस थाना मे गुमशुदगी मामला दर्ज करवाया लेकिन नही तो अभी कोई खोज खबर ओर नही कोई प्रशासन कि ओर से सायता मिली ऐसे मे हम एक होकर प्रशासन कि आख खोल सकते है तो लेकिन परिवार मे आठ सदस्य है ऐसे मे नरेगा रोजगार से घर परिवार चलाना बहुत मुश्किल है जिस परिवार मे कोई कमाने वाला नही है ऐसे मे इस परिवार मे पाँच बेटियों ओर दो सबसे छोटे बेटे जिसमे दो लङकीयो मानसिक बिमारी से ग्रस्त है बङी लङकी कि शादी हो सुकी है लेकिन लङकी के ससुराल वालो ने घर से बेदखल कर दिया ऐसे मे ब्रह्मपुत्र सेना परिवार ने लगभग 60,000 रूपये कि मदद का ऐलान किया है आर्थिक मदद मे संगठन आगे आया हम एक होकर ऐसे कई परिवार है जो संयोग कर सकते है  धन्यवाद सभी राजपुरोहित बधुओ को ब्रह्मपुत्र सेना परिवार राजस्थान कि ओर से  खुब खुब धन्यवाद 

शनिवार, 3 जनवरी 2015

वलसाड में सम्पन हुआ जनजागृति सम्मेलन

ब्रह्म पुत्र सेना
ब्रह्मपुत्र सेना परिवार 

 श्री श्री1008खेतेश्वर भगवान और
श्री श्री1008आत्मानन्दजी महाराज की
तस्वीर पर माल्यार्पण करते हुए

विश्व शांति की प्रार्थना करते हुए

 
संबोधित करते हुए
भारत के कोने~कोने से युवा बन्धु सम्मेलन में भाग लेने के लिये पधारे वलसाड के स्थानीय ब्रह्मपुत्र सेना के सदस्यों के सहयोग से कार्यक्रम रखा गया समाज में नशा,दहेज प्रथा और मृत्यु भोज जैसी कुरुतियों मिटाने की बात रखी गई


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गुरुवार, 1 जनवरी 2015

मेरे मन की आवाज

""मेरे मन की आवाज""
मित्रो "पुरोहित"  यानी "ब्राह्मण",    पुरोहित शब्द वो शब्द हैं जिसे सदियों से राजाओं ,महाराजाओं ने आदर और सम्मान दिया हैं , राजाओं के जमाने में हर काम  ब्राह्मण पुरोहित् के बिना अधूरा माना जाता था,
यहाँ तक की राजा का राजतिलक पुरोहित के बिना नही होता था ,
मित्रो  मुझे मेरे पूर्वजो पर मान हैं उनके पुण्यकर्मो और आशार विचार से उनको (पुरोहित) राजधर्म में  राजा के बराबर या राजा से एक पायदान ऊपर का दर्जा दिया जाता था।
लेकिन आज परिवर्तित होते समय में हम अपने धर्म से भटक गये, पुरोहित कर्म हिन् हो गया, आजका ब्राह्मण नाम के आधार पर पह्साना जाता हैं गुणों के आधार पर नही । कारण यही की आज हम गुण हिन् हो गए,
आजके जमाने में पुरोहित को जब तक नही  पहचाना जाता जबतक वो खुद अपना परिशय ना दे,
हा एक बात और मेने नोट की हैं की आज हमारा युवा वर्ग अपनी पह्सान देते समय "पुरोहित" शब्द की जगह  अपना उपनाम  या गोत्र लगा देते हैं,
जेसे - उदेस,सेवड़,रायगुर, लाफा,दुदावत, हल्सिया, मकोणा वगेरा वगेरा
उदारण के तोर पर मै केवल "मुकेश दुदावत" लिखू तो मुझे पहचानना बहुत कठिन हो जाएगा की मै पुरोहित ब्राह्मण हूँ या और कोई जाती से।इसलिए हमे हमारी पहचान बनाए रखने के लिए अपने नाम के आगे "पुरोहित"शब्द लिखना अति आवश्य हैं।
मित्रो यस्क मुनि की निरुक्त के अनुसार - ब्रह्म जानाति ब्राह्मण पुरोहितं- ब्राह्मण पुरोहित वह है जो ब्रह्म अंतिम सत्य, ईश्वर या परम ज्ञान को जानता है, अतः ब्राह्मण का अर्थ है - "ईश्वर ज्ञाता"
 प्रिय मित्रो ब्राह्मण होने  के क्या गुण हैं हमारे पास, गुरुप में एसे कितने मित्र हैं जो ब्राह्मण धर्म का पालन करते हैं,
मित्रो इस गुरुप में कितने मेंबर हैं जो नियमित जनेहूँ, शिखा, और तिलक धारण करते हैं?
मित्रो मुझे बड़े दुःख के साथ कहना पड़ रहा हैं की ये सब गुण ब्राह्मणों में अब नहीं बचे, आज पुरोहित इस परिवर्तित प्रणाली और धन की लालसा में, इतना कर्म हिन् और गोण हो गया हैं की उसकी मुख्य पहचान शिखा,जनेहु और तिलक को धारण करने में भी शर्म महसूस करता हैं।
हां फेसन के नाम पर लडकियों से भी लम्बे लम्बे बाल रखने में उनको कोई शर्म नहीं आती। इस पाश्च्यात्य संस्कृति से बहार निकलो, अपने धर्म को पहचानो।
मेरा सभी पुरोहित समाज बन्धुओ से आग्रह और अनुरोध हैं की अपनी पहचान बनाए रखने के लीये अपने जीवन प्रणाली में  मुख्य तिन बातो का समावेष अवश्य करे-
1- शिखा धारण करना
2 -तिलक लगाना
3-जनेहूँ धारण करना
धन्यवाद...जय गुरुदेव..

आपका परम हितेसी पुरोहित मुकेश दुदावत..।अधिक जानकारी के लिये like करे

ब्रह्मधाम आसोतरा में हुआ ब्रह्मपुत्र सेना का राष्टीय स्तर गठन

🚩ब्रह्मपुत्र सेनाकाराष्टीय स्तर पर हुआ गठन ।
ब्रह्मधाम आसोतरा में राजपुरोहित युवाओ कामहासमेलन काआजोयन हुआ जिसमेसर्व पर्थम खेतारामजी महाराज और ब्रह्मजी भगवानकोदीप पर्ज्वलं कर समाजसंगठन और एकताके मंच पर कार्यकरणीकासर्व सहमती से विस्तारहुआ जिसमे आम सहमती से अध्यक्ष पद पे श्री परमेश्वर जीनागोर कोचुना गया
उपाध्यक्ष श्री जगदीशजीजालोर ..
महा सचिवश्री युधिस्ट्रर जी पाली ..
सचिवश्री रामसिंह जीजोधपुरव् कोषाअध्यक्ष श्री मदन सिंह जीगुडानाल (बाड़मेर)
कोसर्व सहमती से चुनागयाइसके साथही जिले कीकार्यकरणीमें जिला पर्भारीनियुक्त कर जिले केफॉर्म और सेनाजमेदारी सोपी गई इस समेलन में ब्रह्मधाम ट्रस्ट कीऔर से भरपूर सहयोग मिला कार्यकर्म समापनमें ट्रस्ट कीऔर से श्री रूप सिंह जीने सबकाआभारवयक्त किया
जय 🚩ब्रह्मपुत्र सेनाकी
जय खेतेश्वर दाता री सा


 श्रीमान किशोर सिंह जी राजपुरोहित असाड़ा

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